प्रश्नपत्र-3: अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा, और पर्यावरण) के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं:
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था:
पर्यटन का विस्तार केवल पर्यटकों की संख्या या राजस्व अर्जन से नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और स्थानीय लोगों को कितना लाभ मिल रहा है, इस आधार पर आंका जाना चाहिए।
WEF यात्रा और पर्यटन विकास सूचकांक-2026:
इस सूचकांक में भारत को 110 अर्थव्यवस्थाओं में 31वां स्थान मिला है (वर्ष 2024 में 40वां स्थान था), जो सुधार को दर्शाता है; हालांकि, यह सूचकांक पर्यटकों की संख्या की बजाय कारोबारी वातावरण, डिजिटल और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे पैमानों का आकलन करता है।
संधारणीय पर्यटन (Sustainable Tourism) की आवश्यकता:
पर्यटन विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है, क्योंकि अत्यधिक भीड़ और अनियोजित निर्माण से पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा पैदा हो रहा है।
हस्तक्षेप और संवेदनशीलता:
हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी आपदाएं संवेदनशील इलाकों में सुनियोजित निर्माण और गतिविधियों के नियमन की सख्त मांग करती हैं।
सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण:
मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और ऐतिहासिक बस्तियां केवल पर्यटन केंद्र नहीं बल्कि जीवन-पद्धति का हिस्सा हैं; इसलिए व्यावसायिक गतिविधियों के बीच उनकी गरिमा और ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखना आवश्यक है।
कौशल विकास और डिजिटल तकनीक:
पर्यटन उद्योग की गुणवत्ता वहां काम करने वाले लोगों के कौशल (आतिथ्य, डिजिटल भुगतान, आपदा प्रबंधन) पर निर्भर करती है, जिसके लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण जरूरी है।
समावेशी विकास:
पर्यटन को केवल आय और रोजगार का साधन मानने के बजाय पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक अस्मिता और स्थानीय आत्मनिर्भरता से जोड़ा जाना चाहिए।